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Just me....

Published on May 21, 2026


Look in the mirror And I see a person I hate the most Finding pretty faces around that person fades the glow Finally got the courage to stand for that person and love the life again got broken standing alone in the crowd of million

- Attribution: Sujata


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kash m bhi tere liye ghar bana pata

Published on May 17, 2026


तेरे जाने के बाद, सन्नाटा मेरे कमरे की दीवारों पर उतर आया है। हर खिड़की से झाँकती है तेरी याद, हर दरवाज़ा पूछता है तेरी आहट का राज़। मोहब्बत की नींव तो रखी थी मैंने, पर छत तक पहुँचने से पहले ही तू बिछड़ गई। काश मैं भी तेरे लिए घर बना पाता, जहाँ दीवारों पर तेरी हँसी गूँजती, और आँगन में तेरे कदमों की खनक बसती।

- Attribution: Vipul Yadav


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सदा हमें समझाए नानी

Published on March 29, 2026


सदा हमें समझाए नानी, नहीं व्यर्थ बहाओ पानी । हुआ समाप्त अगर धरा से, मिट जायेगी ये ज़िंदगानी । नहीं उगेगा दाना-दुनका, हो जायेंगे खेत वीरान । उपजाऊ जो लगती धरती, बन जायेगी रेगिस्तान । हरी-भरी जहाँ होती धरती, वहीं आते बादल उपकारी । खूब गरजते, खूब चमकते, और करते वर्षा भारी । हरा-भरा रखो इस जग को, वृक्ष तुम खूब लगाओ । पानी है अनमोल रत्न, तुम एक-एक बूँद बचाओ ।

- Attribution: श्याम सुन्दर अग्रवाल


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हताशा से एक व्यक्ति बेठ गया था ,

Published on March 17, 2026


हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे वह नहीं जानता था मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था हम दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे साथ चलने को जानते थे।

- Attribution: विनोद कुमार शुक्ल


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The writer Mar 20, 06:43

may God too send someone in your life that knows the importance of your presence

vipul yadav Mar 20, 07:20

Thanks dear 😊

मैं मिलूँगा

Published on March 12, 2026


मैं नहीं मिलूँगा किसी के खयालों में , सोच में , डायरी के पन्नों में , किसी की मुस्कान में , किसी की सुबह की शुरुआत में , मैं मिलूँगा मेरे घर के बंद कमरे में , जहाँ होगा थोड़ा अंधेरा , कुछ किताबें , जिन किताबों में होंगे हजारों-लाखों पत्र , उन पत्रों से बतियाता हुआ मिलूँगा उनमे खोया हुआ मिलूँगा .....

- Attribution: सूरज मौर्या


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बे - वजह

Published on March 04, 2026


कभी-कभी मुस्कुराने के लिए कोई वजह नहीं चाहिए होती... कुछ लोग वजह ढूँढते रह जाते हैं, और कुछ लोग बस जी लेते हैं। मैं भी उन्हीं में से हूँ - जो बे-वजह हँसते हैं, बे-वजह खामोश हो जाते हैं, बे-वजह आसमान को देर तक देखते रहते हैं, और बे-वजह किसी याद में खो जाते हैं... लोग इसे पागलपन कहते हैं, पर सच तो ये है कि जिसे दुनिया समझ नहीं पाती, उसे वो नाम दे देती है - पागल । मगर मैं जानता हूँ... ये पागलपन नहीं, ये दिल का ज़िंदा होना है हर खुशी का कारण नहीं होता, कुछ खुशियाँ बस महसूस होती हैं... और शायद वही सबसे सच्ची होती हैं।

- Attribution: सानिध्य जैन


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Ramz

Published on March 01, 2026


tum jab aaogī to khoyā huā pāogī mujhe merī tanhā.ī meñ ḳhvāboñ ke sivā kuchh bhī nahīñ mere kamre ko sajāne kī tamannā hai tumheñ mere kamre meñ kitāboñ ke sivā kuchh bhī nahīñ in kitāboñ ne baḌā zulm kiyā hai mujh par in meñ ik ramz hai jis ramz kā maarā huā zehn muzhda-e-ishrat-e-anjām nahīñ pā saktā zindagī meñ kabhī ārām nahīñ pā saktā

- Attribution: jaun eliya


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