मैं नहीं मिलूँगा किसी के खयालों में , सोच में , डायरी के पन्नों में , किसी की मुस्कान में , किसी की सुबह की शुरुआत में , मैं मिलूँगा मेरे घर के बंद कमरे में , जहाँ होगा थोड़ा अंधेरा , कुछ किताबें , जिन किताबों में होंगे हजारों-लाखों पत्र , उन पत्रों से बतियाता हुआ मिलूँगा उनमे खोया हुआ मिलूँगा .....
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