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सदा हमें समझाए नानी

Published on March 29, 2026


सदा हमें समझाए नानी, नहीं व्यर्थ बहाओ पानी । हुआ समाप्त अगर धरा से, मिट जायेगी ये ज़िंदगानी । नहीं उगेगा दाना-दुनका, हो जायेंगे खेत वीरान । उपजाऊ जो लगती धरती, बन जायेगी रेगिस्तान । हरी-भरी जहाँ होती धरती, वहीं आते बादल उपकारी । खूब गरजते, खूब चमकते, और करते वर्षा भारी । हरा-भरा रखो इस जग को, वृक्ष तुम खूब लगाओ । पानी है अनमोल रत्न, तुम एक-एक बूँद बचाओ ।

- Attribution: श्याम सुन्दर अग्रवाल


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हताशा से एक व्यक्ति बेठ गया था ,

Published on March 17, 2026


हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे वह नहीं जानता था मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था हम दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे साथ चलने को जानते थे।

- Attribution: विनोद कुमार शुक्ल


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The writer Mar 20, 06:43

may God too send someone in your life that knows the importance of your presence

vipul yadav Mar 20, 07:20

Thanks dear 😊

बे - वजह

Published on March 04, 2026


कभी-कभी मुस्कुराने के लिए कोई वजह नहीं चाहिए होती... कुछ लोग वजह ढूँढते रह जाते हैं, और कुछ लोग बस जी लेते हैं। मैं भी उन्हीं में से हूँ - जो बे-वजह हँसते हैं, बे-वजह खामोश हो जाते हैं, बे-वजह आसमान को देर तक देखते रहते हैं, और बे-वजह किसी याद में खो जाते हैं... लोग इसे पागलपन कहते हैं, पर सच तो ये है कि जिसे दुनिया समझ नहीं पाती, उसे वो नाम दे देती है - पागल । मगर मैं जानता हूँ... ये पागलपन नहीं, ये दिल का ज़िंदा होना है हर खुशी का कारण नहीं होता, कुछ खुशियाँ बस महसूस होती हैं... और शायद वही सबसे सच्ची होती हैं।

- Attribution: सानिध्य जैन


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